मेरी लेखन शैली क्या है? | My Writing Style Explained – Shubham Arya
मेरी लेखन शैली क्या है? | My Writing Style Explained – Shubham Arya
परिचय
लेखन मेरे लिए केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है, बल्कि अपने अनुभवों और विचारों को समझने की एक प्रक्रिया भी है। हर लेखक की तरह मेरी भी एक शैली है, लेकिन वह किसी एक दायरे में सीमित नहीं है। समय, अनुभव और विषय के अनुसार उसमें बदलाव आता रहता है।
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कविता: शांत पीड़ा और यथार्थ का स्वर
मेरी कविताओं में अक्सर एक शांत पीड़ा और यथार्थ की झलक दिखाई देती है। यह पीड़ा केवल दुख का प्रदर्शन नहीं, बल्कि उन अनुभवों की परत है जो जीवन के साथ धीरे-धीरे जुड़ते जाते हैं।
मैं अपनी कविताओं में चीज़ों को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं दिखाता, बल्कि उन्हें उसी रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश करता हूँ, जैसे वे महसूस होती हैं—साधारण, लेकिन गहरी।
कहानी लेखन: विविधता और प्रयोग
कहानी लेखन में मैं खुद को किसी एक शैली तक सीमित नहीं रखता। अलग-अलग विषयों और परिस्थितियों के अनुसार मेरा दृष्टिकोण बदलता है।
मेरे लिए कहानी केवल घटनाओं का क्रम नहीं होती, बल्कि वह एक अनुभव होती है—जिसमें पात्र, उनकी मनःस्थिति और उनके निर्णय महत्वपूर्ण होते हैं। इसी कारण मैं विभिन्न शैलियों के साथ प्रयोग करना पसंद करता हूँ।
स्क्रीनप्ले लेखन में रुचि
मेरी रुचि स्क्रीनप्ले में भी है। सिनेमा की भाषा मुझे हमेशा से आकर्षित करती है, क्योंकि यहाँ कहानी केवल शब्दों से नहीं, बल्कि दृश्यों, संवादों और मौन के माध्यम से कही जाती है।
मैं स्क्रीनप्ले लेखन को केवल एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक अलग तरह की सोच मानता हूँ—जहाँ हर दृश्य का अपना अर्थ और उद्देश्य होता है।
अवलोकन: लेखन की नींव
मेरे लेखन की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला अवलोकन (observation) है। रोज़मर्रा की छोटी-छोटी घटनाएँ, लोगों का व्यवहार, और जीवन के साधारण क्षण—यही मेरे लेखन को आकार देते हैं।
मैं मानता हूँ कि एक लेखक जितना अधिक देखता और समझता है, उसका लेखन उतना ही वास्तविक और प्रभावशाली होता है।
निष्कर्ष
अंततः, मेरी लेखन शैली किसी एक परिभाषा में सीमित नहीं है। कविता में जहाँ शांत पीड़ा और यथार्थ दिखाई देता है, वहीं कहानी और स्क्रीनप्ले में विविधता और प्रयोग का स्थान है।
शायद यही संतुलन मेरे लेखन को एक दिशा देता है—जहाँ अभिव्यक्ति केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि अनुभव का रूप ले लेती है।



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